
मिडिल ईस्ट की रातें वैसे भी शांत नहीं होतीं, लेकिन इस बार मामला थोड़ा ज्यादा गर्म है. ईरान ने खाड़ी के कई देशों में मौजूद अमेरिकी रडार और मिसाइल डिटेक्शन सिस्टम को निशाना बनाकर अमेरिकी अर्ली वार्निंग नेटवर्क को झटका दिया है.
इसका मतलब ये एक हमला नहीं बल्कि आसमान की निगरानी करने वाली आंखों पर वार है. और यही वजह है कि यह खबर दुनिया भर के सुरक्षा विश्लेषकों के लिए अचानक “हॉट फाइल” बन गई है.
ऑपरेशन ‘ट्रू प्रॉमिस-4’ क्या है
ईरान के सैन्य ढांचे Islamic Revolutionary Guard Corps ने इन हमलों को अपने अभियान “True Promise-4” का हिस्सा बताया है. तेहरान का कहना है कि यह कदम हाल के अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के जवाब में उठाया गया. दावा यह भी है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशनों को ट्रैक करने वाले सिस्टम को निष्क्रिय करना था.
किन देशों में लगे थे अमेरिकी सिस्टम
रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य निगरानी ढांचा मौजूद है, उनमें शामिल हैं
• Saudi Arabia
• Qatar
• United Arab Emirates
• Jordan
• Kuwait
• Bahrain
इन ठिकानों पर मौजूद रडार डोम और SATCOM टर्मिनलों के नुकसान की चर्चा सामने आई है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि हर जगह से नहीं हुई है.
खास निशाने पर कौन से सिस्टम
विशेषज्ञों के मुताबिक इन हमलों में प्रमुख लक्ष्य हाई-एंड एयर डिफेंस सिस्टम थे. इनमें THAAD Missile Defense System जैसे रडार शामिल बताए जा रहे हैं, जो लंबी दूरी की मिसाइलों को ट्रैक करने के लिए लगाए जाते हैं. अगर ऐसे सिस्टम को नुकसान पहुंचता है तो किसी भी देश की अर्ली वार्निंग क्षमता कमजोर पड़ सकती है.

ट्रंप मानने को तैयार नहीं
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राजनीति भी गर्म हो गई. अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक इंटरव्यू में ईरानी आरोपों को खारिज करते हुए तेहरान के नेताओं पर तीखी टिप्पणी की.
दूसरी ओर ईरान के वरिष्ठ नेता Ali Larijani पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि अमेरिका को अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ सकती है.
खाड़ी देशों के लिए चेतावनी
विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी है. संदेश यह कि अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ा तो अमेरिकी सैन्य ढांचे भी सुरक्षित नहीं माने जाएंगे. यानी मिडिल ईस्ट की शतरंज में अब चालें और ज्यादा तेज़ होने वाली हैं.
अगर ईरान के दावे सच निकलते हैं, तो यह सिर्फ एक जवाबी हमला नहीं बल्कि डिजिटल-एयर डिफेंस युद्ध का नया अध्याय हो सकता है. और अगर दावे बढ़ा-चढ़ाकर किए गए हैं, तो भी एक बात साफ है मिडिल ईस्ट की हवा में बारूद की गंध अभी खत्म नहीं हुई.
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